BREAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

IDEAL INDIA , IJA

IDEAL INDIA , IJA

शिक्षा और संस्कार

 

शिक्षा और संस्कार एक-दूसरे के पूरक हैं। शिक्षा जहाँ व्यक्ति को ज्ञान और कौशल प्रदान करती है, वहीं संस्कार उसे एक अच्छा इंसान बनाते हैं। केवल शिक्षित होना पर्याप्त नहीं है; संस्कारयुक्त शिक्षा ही समाज को सही दिशा प्रदान कर सकती है।

संस्कारों की पहली पाठशाला परिवार होती है, लेकिन विद्यालय और शिक्षा संस्थानों की भूमिका भी इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शिक्षा के माध्यम से बच्चों में सत्य, अहिंसा, सम्मान, करुणा और जिम्मेदारी जैसे नैतिक मूल्यों का विकास किया जाता है। यही मूल्य आगे चलकर उनके चरित्र की नींव बनते हैं।

आज के समय में जब शिक्षा केवल अंकों और डिग्रियों तक सीमित होती जा रही है, तब संस्कारों का महत्व और भी बढ़ जाता है। यदि शिक्षा के साथ संस्कार न हों, तो व्यक्ति अपनी बुद्धि का दुरुपयोग भी कर सकता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल सफल पेशेवर बनाना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना होना चाहिए।

संस्कारयुक्त शिक्षा व्यक्ति को समाज और संस्कृति से जोड़ती है। इससे वह अपनी परंपराओं, मूल्यों और सामाजिक कर्तव्यों को समझता है। ऐसा व्यक्ति न केवल अपने हित के बारे में सोचता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण में भी योगदान देता है।

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि शिक्षा और संस्कार मिलकर ही पूर्ण मानव का निर्माण करते हैं। जब शिक्षा को संस्कारों का आधार मिलता है, तब वही शिक्षा समाज को सशक्त, सभ्य और प्रगतिशील बनाती है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ